Saturday, June 12, 2021

1991 में मुलायम सिंह सरकार थी, स्वकेंद्र प्रणाली में जम के नकल हुई लेकिन हम ठहरे डरपोक विद्यार्थी इसलिए नकल नही किये, ज्वाइंडिस भी हो गया था, पापा साइकिल से एग्जाम में स्कूल छोड़ने जाते थे, फिर भी ठीक ठाक नम्बर से हाई स्कूल पास कर लिए,
इन्टरमीडिएट क्लास में आ गए हल्की दाढ़ी मूछ भी आने लगी, अब खुद को बड़ा समझने लगे थे, एक साइकिल थी मेरे पास पापा ने नई दिलाई थी इंटर में आने पर, रोज़ उसको बड़े जतन से धोते चमकाते थे, हवा बिल्कुल टाइट रहती थी और बड़ी शान से पीछे लम्बा सा चमड़े का बैग टांग के स्कूल जाते थे,

एक दिन अपने स्कूल के पी कॉलेज से रामबाग के रास्ते कॉर्स्थवेट गर्ल्स कॉलेज की तरफ से घर लौट रहे थे बगल से एक खाली ट्रक गुज़रा तो बकैती में उसके पीछे लटकी चेन पकड़ ली, एक तो साइकिल चलाने की मेहनत बचेगी ऊपर से जल्दी घर पहुंचेंगे, नक्शेबाज़ी अलग से,
तभी पीछे से एकाएक किसी ने ज़ोर से खींच के कॉलर पकड़ा, देखा तो एक पुलिस वाला बाइक से चलते हुए मुझे पकड़े हुए था, ऐसा लगा स्मगलिंग करते हुए रंगे हाथ पकड़ लिए गए,डर के मारे हवा खराब, उसने मुझे रोका और सड़क के किनारे ले गया, न कोई सवाल न जवाब, मुझे बड़ी शांति से आदेश दिया,"चश्मा उतारो" बहस करने का मतलब ही नही था, चश्मा उतारते ही एक झन्नाटेदार झापड़ गाल पर छप गया, कान सुन्न पड़ गया और मन मे हज़ारो गाली लेकिन चुप रहे,
फिर उसने इतना ही कहा, ट्रक के नीचे घुस जाओगे तो पता नही चलेगा, आगे से याद रखना
सीधे घर पहुंचे माता जी ने देखते ही पूछा "ये गाल पे क्या हुआ?"
इतनी बेइज़्ज़ती कैसे बताते, कहा,"वो क्लास में सभी बच्चों ने काम गड़बड़ किया था सब को टीचर ने एक एक थप्पड़ दे दिया"
माता जी बोलीं"ठीक किया सही से काम किया करो"

तो मित्रों उस दिन के बाद साइकिल से आते जाते जब भी कोई ट्रक बगल से गुज़रा तो उस पुलिस वाले का झन्नाटेदार झापड़ ज़रूर याद आया और दुबारा फिर किसी ट्रक की चेन पकड़ने की हिम्मत नही हुई,
सबक ये भी है कि सही समय पे सही तरीके मारा गया एक थप्पड़ आजीवन आपको कोई गलती विशेष करने से रोक सकता है, बहुत पुरानी बात है आज पता नही कैसे याद आ गई, किसी को अब तक नही बताया था आज यहां शेयर कर रहा हूँ 🙂

Saturday, June 5, 2021

हमने राजा चुना है। या नेता?

मोनार्की में एक राजा होता है जो प्रजा से कुछ भी नहीं पूछता खुद को ही राजा घोषित कर देता है और आगे जिसका मन करता है, वह राजा बन जाता है। 

बस ताकत की जरूरत होनी चाहिए। 

जबकि डेमोक्रेसी एक अलग व्यवस्था है। यहां पर जनता का राज होता है। पर हर एक नागरिक तो राज्य कर नहीं सकता। तुम अपना छोटे स्तर पर नेता चुनता है। वह नेता मिलकर एक बड़ा नेता चुनते हैं। 

और वह नेता कुछ और नेताओं के साथ एक मंत्रियों का समूह बनाता है। इस तरह देश पर राज्य किया जाता है। वोट देने के लिए। हर एक व्यक्ति अपने छोटे ग्रुप का एक एक नेता चुनता है। 

अब आते हैं आज के सिचुएशन में। आज के सिचुएशन में हम अपने छोटे नेता को देखते भी नहीं हैं। हम अपने देश के बड़े नेता को देखकर अपना छोटा नेता चुनते हैं। 

वह छोटा neta यह जानता है कि उसे बड़े नेता की वजह से चुना गया है। इसलिए वह ना आपकी बातों को रख पाता है। ना ही बड़े नेता की गलतियों पर आवाज उठाता है। 



इस तरीके से यह डेमोक्रेसी ना हो करके pseudo monarchy हो जाती है। 

अब जब आपने राजा चुना है तो राजा तो वैसे ही व्यवहार करेगा जैसे सदियों से इस देश में राजाओं ने अपने प्रजा के साथ व्यवहार किया है। 

तो दोस्तों गलती किसकी है? 

राजा की या आपकी? 

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Wednesday, June 2, 2021

Post for andh bhakts

Agreed..

In totality everything has improved..

1. Economy
2. Healthcare
3. Citizens justice
4. Inflation.
5. Education cost
6.Research 
7. Low performance government companies.
8. We are amongst top in media freedom.
9. Kashmir issue resolved.
10. New parliament 
11. Air India one
12. Jobs are increasing at good rate.
13. Taxes are lower than previous governments

And many more...

Only people suffering are people without talent and skill.

I will give 10/10 to this government.

Galgotias University Information SCSE

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Tuesday, June 1, 2021

सरकारी ठेकों द्वारा नौजवानों को रोजगार।

रेलवे स्टेशन का ठेका हो या एयरपोर्ट का ठेका यह कोई ऐसी रॉकेट साइंस नहीं है जिससे प्रॉफिट में लाना बहुत मुश्किल काम है। ऐसे ठेके हमारे देश में यदि पढ़े-लिखे नौजवानों को उनके इंटरव्यू या उनके ज्ञान के आधार पर दिए जाएं तो। इससे देश में नौजवानों का मनोबल बढ़ेगा तथा रोजगार उत्पन्न होंगे और देश का पैसा देश में ही रहेगा। हाल ही में अदानी जी को। एयरपोर्ट का ठेका दिया गया। 

उन्होंने आज क्या किया? लखनऊ एयरपोर्ट की फीस 10 गुना बढ़ा दी है। अब इस तरीके से मनमाने रेट बढ़ा कर तो कोई भी विकास किया जा सकता है। बात तो तब है जब रीजनेबल पैसे लेकर विकास किया जाए। 

इस तरीके के छोटे-मोटे ठेके अभी हमारे देश के नौजवानों को मिलेंगे तो इससे उनके अंदर रोजगार मिलेगा तथा उन्हें भी देश के लिए कुछ करने का मौका मिलेगा। अडानी हो गए। अंबानी हो गए या कोई भी बड़े बिजनेसमैन है। यह लोग तो पहले से ही अमीर हैं और इनके पास करने के लिए बहुत से काम है और काम करने के लिए पूरी दुनिया पड़ी है। लेकिन यदि ऐसे छोटे-मोटे प्रोजेक्ट्स यदि हमारे पढ़े-लिखे नौजवानों को दिए जाएंगे तो इससे उनमें एक। स्वयं से कुछ करने की भावना उत्पन्न होगी और इससे देश का विकास होगा।