रेलवे स्टेशन का ठेका हो या एयरपोर्ट का ठेका यह कोई ऐसी रॉकेट साइंस नहीं है जिससे प्रॉफिट में लाना बहुत मुश्किल काम है। ऐसे ठेके हमारे देश में यदि पढ़े-लिखे नौजवानों को उनके इंटरव्यू या उनके ज्ञान के आधार पर दिए जाएं तो। इससे देश में नौजवानों का मनोबल बढ़ेगा तथा रोजगार उत्पन्न होंगे और देश का पैसा देश में ही रहेगा। हाल ही में अदानी जी को। एयरपोर्ट का ठेका दिया गया।
उन्होंने आज क्या किया? लखनऊ एयरपोर्ट की फीस 10 गुना बढ़ा दी है। अब इस तरीके से मनमाने रेट बढ़ा कर तो कोई भी विकास किया जा सकता है। बात तो तब है जब रीजनेबल पैसे लेकर विकास किया जाए।
इस तरीके के छोटे-मोटे ठेके अभी हमारे देश के नौजवानों को मिलेंगे तो इससे उनके अंदर रोजगार मिलेगा तथा उन्हें भी देश के लिए कुछ करने का मौका मिलेगा। अडानी हो गए। अंबानी हो गए या कोई भी बड़े बिजनेसमैन है। यह लोग तो पहले से ही अमीर हैं और इनके पास करने के लिए बहुत से काम है और काम करने के लिए पूरी दुनिया पड़ी है। लेकिन यदि ऐसे छोटे-मोटे प्रोजेक्ट्स यदि हमारे पढ़े-लिखे नौजवानों को दिए जाएंगे तो इससे उनमें एक। स्वयं से कुछ करने की भावना उत्पन्न होगी और इससे देश का विकास होगा।
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