आप क्या चाहते हैं?
अच्छे काम की तारीफ न करूँ?
बुरे काम की आलोचना न करूँ?
तो क्या करूँ?
चापलूसी करूँ? झूठ बोलूं कि राजा बहुत अच्छा है और प्रजा का हित चाहता है?
ये सब मुझसे नहीं हो पायेगा.
आपकी आँख से दिखना बन्द हो गया है क्या? गाँव-देहात की एक चौथाई आबादी सिर मुंड़ाए टहल रही है, और आप कह रहे हैं कि लोगों की मौत की खबरें विपक्ष की साजिश हैं?
इतना बेशर्म मत हो जाइये.
पार्टी सरकार नहीं है, सरकार देश नहीं है. जब भी जरूरत पड़े, बुलंद आवाज़ में कहिये कि राजा नंगा है.
आपकी ये चुप्पी, ये चापलूसी पहले इस देश के लोकतंत्र को, फिर देश को खा जाएगी.
पहले एक जिम्मेदार नागरिक बनिये, उसके बाद कांग्रेसी, भाजपाई, कम्युनिस्ट या जो मन कहे बन जाइयेगा.
यही देशप्रेम है.
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