Sunday, May 23, 2021

Kissa kahani

सईद कई साल से हमारे यहां तकरीबन रोज़ ठेले पर सब्ज़ी ले कर आता है लॉक डाउन में भी इनका सब्ज़ी बेचने जा क्रम नहीं रुका, मैं शुरू से ही सब्ज़ी वालों को लेकर ज़रा टाइट रहा हूं, सब्ज़ी बिल्कुल ताज़ी हो,मोल भाव ज़रा ठीक से हो और तमाम सब्ज़ी लेने के बाद लास्ट में नीबू, धनिया और हरा मिर्चा फ़्री में सब्ज़ी वाला न दे तो डांट फटकार लानत तय रही है,

फिर धीरे धीरे ही सही यह बात समझ मे आने लगी कि ठेले पर सब्ज़ी बेचने वाला हो, रिक्शे वाला या मज़दूर हो ये वास्तव में सम्मान देने के लायक लोग हैं कम से कम इज़्ज़त से जीने के लिए मेहनत करते हैं चोरी बेईमानी तो नहीं करते किसी को फ़िज़ूल दान करने से बेहतर है लेन देन के ज़रिए से इनकी ही मदद की जाए,
बहरहाल आज भी सईद बाबू आए श्रीमती जी सब्ज़ी ले रही थीं हम भी बाहर पौधों में पानी लगा रहे थे, सईद भाई हमसे कन्फर्म करते हए बोले, "साहब लॉक डाउन तो 24 से खत्म हो रहा है" 
"नहीं अभी इस महीने और चलेगा" हम जवाब दिए
"नहीं मोबाइल पर मैसेज आया था 24 से खत्म हो जाएगा" सईद भाई ज़ोर से बोले, मुंहलगे टाइप के पहले ही है वो
"अरे यार खत्म हो न हो तुम तो रोज़ सब्ज़ी बेच ही रहे ही तुम्हे क्या दिक्कत" हम भी ज़रा चिढ़ के बोले
"नहीं साहब सिर्फ मेरे अकेले बेचने से क्या होगा, बात तो तब है जब सब लोग फिर से अपना काम अपना काम धंधा शुरू कर सकें सब खुशहाल हों, और जब सब लोगों की जेब मे पैसा होगा तभी तो लोग ठीक से सब्ज़ी भी ख़रीदेंगे, आप नौकरी वाले हो सब थोड़े न आप की तरह सब्ज़ी ले रहे"
इस प्रवचन ने सईद भाई के सामने हमको बिल्कुल निरुत्तर कर दिया, 
हम लोग अपने आप को बड़का सामाजिक विज्ञानी और अफलातून समझते होंगे सईद भाई सब्ज़ी वाले का सर्वजन कल्याण पर नज़रिया और समाज के विभिन्न वर्गों के मध्य आर्थिक अंतर्निर्भरता पर दिये गए व्यवहारिक ज्ञान से दिनदहाड़े हमारे ज्ञान चक्षु खुल गए, ज्ञान जहां से भी मिले सविनय ग्रहण कर लेना चाहिए 🙂

हरि ओम 🙏



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